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विझिनजाम बंदरगाह पर पहुंचा विश्व का सबसे बड़ा मालवाहक पोत 'एमएससी इरीना', भारत के लिए ऐतिहासिक पल

 
विझिनजाम बंदरगाह पर पहुंचा विश्व का सबसे बड़ा मालवाहक पोत 'एमएससी इरीना', भारत के लिए ऐतिहासिक पल

विश्व का सबसे विशालकाय कंटेनर जहाज एमएससी इरीना सोमवार को केरल स्थित विझिनजाम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह पर सफलतापूर्वक लंगर डाल चुका है। इस मौके को बंदरगाह के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। सुबह करीब 8 बजे जैसे ही यह जहाज बंदरगाह के प्रवेशद्वार पर पहुंचा, उसका स्वागत पारंपरिक वॉटर सैल्यूट के जरिए किया गया।

यह जहाज 3 जून को ही विझिनजाम के बाहरी समुद्री क्षेत्र में पहुंच गया था, लेकिन पहले से निर्धारित छह अन्य जहाजों की गतिविधियों के चलते इसे किनारे तक पहुंचने में कुछ दिन की देरी हुई। इस संदर्भ में कैप्टन विली एंटनी ने बताया कि जहाज से लगभग 3,000 कंटेनरों को उतारा जाएगा।

दुनिया की सबसे अधिक टीईयू क्षमता वाला पोत
एमएससी इरीना को 2023 में खासतौर से एशिया और यूरोप के बीच भारी मात्रा में सामान ढोने के लिए बनाया गया था। यह जहाज 399.9 मीटर लंबा और 61.3 मीटर चौड़ा है। इसकी टीईयू (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) क्षमता 26,346 है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा कंटेनर पोत बनाती है। इसके डेक का क्षेत्रफल एक सामान्य फीफा फुटबॉल मैदान से चार गुना अधिक है। इसका ड्राफ्ट 16.2 मीटर का है, जो विशाल जहाजों के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है।

विझिनजाम की गहराई ने आसान बनाया आगमन
कैप्टन विली एंटनी ने इतने विशाल जहाज को भारतीय जल क्षेत्र में लाने पर गर्व जताया। उन्होंने यह भी कहा कि विझिनजाम की प्राकृतिक गहराई अन्य बंदरगाहों की तुलना में कहीं अधिक है, जिससे इतने बड़े जहाज का आगमन संभव हो पाया है। एर्नाकुलम जिले के अंगमाली का एक अन्य मलयाली युवक भी इस जहाज के चालक दल में शामिल है।

यह विशालकाय पोत "पोस्ट-स्वेजमैक्स" श्रेणी का हिस्सा है और 28 मई को सिंगापुर से रवाना हुआ था। विझिनजाम पर कंटेनर अनलोडिंग पूरी करने के बाद यह जहाज अपनी अगली मंज़िल स्पेन के लिए रवाना होगा।

अडानी समूह संचालित कर रहा विझिनजाम पोर्ट
विझिनजाम इंटरनेशनल पोर्ट का उद्घाटन हाल ही में, 2 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। इस बंदरगाह का संचालन अडानी समूह द्वारा किया जा रहा है। एमएससी इरीना की यहां उपस्थिति न केवल बंदरगाह की तकनीकी दक्षता को दर्शाती है, बल्कि भारत को वैश्विक समुद्री मानचित्र पर एक नई पहचान भी दिलाती है।