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हरित कौशल विकास कार्यक्रम को रोजगार परक बनाने के अरुणेश मिश्रा के सलाह को केंद्र की सहमति
 

हरित कौशल विकास कार्यक्रम (GSDP) देश भर में जनांकिकीय लाभ को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया हैं.  हरित कौशल विकास कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को हरित कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना और पर्यावरण और वन क्षेत्र में कौशल अंतराल को भरना है. वहीं दूसरी तरफ एक मास्टर ट्रेनर (अपशिष्ट-प्रबंधन), पशु-प्रेमी अरुणेश मिश्रा ने 9 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा.

Green Skill Development Programme (GSDP)

आपको बता दें उस पत्र में उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा चलाये जाने वाले हरित कौशल विकास कार्यक्रम को रोजगारपरक तथा इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने हेतु कई सुझाव भेजे थे. वो सुझाव इस प्रकार हैं....

1. इस कार्यक्रम के तहत ट्रेनिंग प्राप्त करने वाले छात्रों को केंद्र एवं राज्य सरकार के स्तर पर निकलने वाले इससे सम्बंधित विभागों के रिक्तियों में प्राथमिकता सुनश्चित की जानी चाहिए. 

2. इस कार्यक्रम को कराने वाले एनविस सेन्टरों का वरिष्ठ पदाधिकारियों के नेतृत्व में समय-समय पर औचक निरिक्षण इसकी गुणवत्ता को बनाये रखने हेतु ही जानी चाहिए.

3. छात्रों को ट्रेनिंग देने वाले शिक्षकों के मेहनताना तथा बच्चों को ट्रेनिंग के दौरान विजिट, ब्रेकफास्ट, लंच इत्यादि हेतु सरकार से एनविस सेंटरों को मिलने वाली राशि को ट्रेनिंग प्राप्त करने वाले चयनित अभ्यर्थियों एवं शिक्षकों के खाते में मंत्रालय के द्वारा भेजना सुनिश्चित की जानी चाहिए.

4. इस प्रोग्राम के अंतर्गत ट्रेनिंग प्राप्त कर चुके सभी छात्रों को भी एनविस सेंटरों के द्वारा संचालित की जाने वाले आगामी बैच में पढ़ाने का मौका देने का प्रावधान निश्चित रूप से किया जाना चाहिए ताकि उनके ज्ञानात्मक स्तर में वृद्धि हो.

5. इस कार्यक्रम को भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय से जोड़ने की कवायद  की जानी चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर सरकारी बैंकों द्वारा उन्हें स्वरोजगार हेतु ऋण प्रदान की जा सकें.

6. शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार से भी ट्रेनिंग प्राप्त करने वाले छात्रों को मान्यता मिलनी चाहिए ताकि वृहत स्तर पर इसका लाभ उठाया जा सकें.

7. इस ट्रेनिंग को प्राप्त कर चुके अभ्यर्थियों को डिजिटल सर्टिफिकेट दिए जाने का प्रावधान सुनिश्चित की जानी चाहिए एवं उनका नाम श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के पोर्टल पर भी दर्द हो या बेहद आवश्यक है ताकि किसी भी मंत्रालय या विभाग को ऐसे अभ्यर्थियों की बहाली की जरूरत हो वो सीधे उनसे संपर्क स्थापित कर सकें.

 8. इस कोर्स को विभिन्न एनविस संस्थानों के जरिए धरातल पर उतारने हेतु भारत सरकार विभिन्न रूपों में बहुत प्रयास करती है पर इस कार्यक्रम की रूपरेखा को और धारदार बनाने हेतु ग्रीन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम की समय सीमा को बढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए.

9. संख्याबल पर जोर देने के बजाय इसे कम रखकर ही ट्रेनिंग प्राप्त कर चुके एवं प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को शत-प्रतिशत रोजगार मुहैया कराने की पूरी जिम्मेदारी ट्रेनिंग देने वाले एनविस संस्थानों की होनी चाहिए. ट्रेनिंग प्रदान करने वाले सारे संस्थान की जिम्मेदारी जब रोजगार उपलब्ध करवाने की हो जायेगी तभी इस प्रोग्राम के वास्तविक उद्देशयों को सही दिशा मिलेगी.

10. जो संस्थान खुद से जीतने लोगों को रोजगार प्रदान करने में या कहीं और दिलवाने में क्षमतावान हो उन्हें उतने बच्चों को ही ट्रेनिंग देने का निर्देश मंत्रालय की ओर से दी जानी चाहिए ताकि संसाधनों का सही मायनों में उपयोग हो सके. जो भी संस्थान मास्टर ट्रेनर को रोजगार मुहैया कराने का दावा प्रोजेक्ट एक्सटेंशन के समय कर चुके हैं या आगामी वर्षों में करेंगे इसकी जांच मंत्रालय को अपने स्तर पर सुनिश्चित करवाने की ओर विचार करना चाहिए एवं छात्रों से इसकी फीडबैक लेनी चाहिए.

11. ट्रेनिंग प्राप्त कर चुके छात्रों को सरकारी एवं निजी संस्थानों में रोजगार प्रदान किए जाने के उपरांत  सम्मानजनक वेतन उनकी योग्यता एवं दक्षता के आधार पर मिले इसका निर्धारण भी भारत सरकार को करनी चाहिए तथा प्रतिवर्ष एक्सटेंशन देते वक्त एनविस सेंटरों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. सभी प्रावधानों पर खड़ा उतरने के उपरांत बेहतर परिणाम देने वाले एनविस संस्थानों को सम्मानित भी किया जाना चाहिए.

वहीं जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक अरुणेश मिश्रा द्वारा लिखे गए पत्र का जवाब देते हुए भारत सरकार ने उनके हरित कौशल विकास कार्यक्रम को रोजगारपरक तथा इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने हेतु दिए गए सुझाव पर अमल किया है. इतना ही नहीं उनके सुझाव को हरित कौशल विकास कार्यक्रम में शामिल करने की मंत्रालय द्वारा कवायद की जायेगी. वैसे बता दें इससे देश भर के हजारों लोग लाभान्वित होंगे.

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