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अमित शाह से पहले शरद यादव पहुंचे बिहार, नीतीश के मिशन 2024 को देंगे धार ?
 

बिहार की राजनीति का माहौल इन दिनों खूब गर्म है. इसे 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों की आंच मिल रही है. इस कड़ी में दो बड़े नेताओं का बिहार दौरा अहम है. केंद्रीय गृह मंत्री जल्‍दी ही बिहार आने वाले हैं. उनसे पहले शरद यादव का बिहार दौरा हो रहा है. इन दोनों नेताओं के बिहार आने के अपने मायने हैं.

दिग्गज समाजवादी नेता और जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव एक बार फिर बड़ी राजनीतिक भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं. वे आज मंगलवार को बिहार की राजधानी पटना पहुंचे, जहां राष्ट्रीय जनता दल द्वारा आयोजित शीर्ष बैठक में भाग लेंगे. यह बैठक पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर बुलाई गई है, लेकिन इस यात्रा में उनकी मुलाकात राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी होगी. चूंकि, नीतीश कुमार ने एलान कर दिया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में वे विपक्षी दलों की एकता बनाने को लेकर गंभीर प्रयास करेंगे, दोनों नेताओं की यह मुलाकात महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है.

पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. सर्वसम्मति से उन्हें आगे भी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए रखने पर सहमति बन चुकी है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के लिए जगदानंद सिंह ने नामांकन भी दाखिल कर दिया है. उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है. राजद सूत्रों के मुताबिक नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में एक बार फिर उन्हें ही जिम्मेदारी मिलने की संभावना है. चूंकि अब तक किसी और ने नामांकन दाखिल नहीं किया है. इसी चुनाव के बहाने राष्ट्रीय जनता दल के शीर्ष नेताओं की बैठक हो रही है. माना जा रहा है कि इस बैठक में बिहार में तेजस्वी यादव की आगे की भूमिका और लोकसभा चुनाव में पार्टी की भूमिका पर गंभीरता के साथ विचार किया जा सकता है.

पार्टी एक साथ दो मोर्चों पर प्रमुख भूमिका निभाने की तैयारी कर रही है. वह प्रदेश स्तर पर तेजस्वी यादव की छवि एक बेहतर काम करने वाले नेता के रूप में स्थापित करने के लिए रणनीति बनाएगी, तो लोकसभा चुनाव में पार्टी की मजबूत दावेदारी के लिए क्षेत्रवार रणनीति तय करेगी. इसके लिए बिहार की राजनीति में हाल ही में घटी घटनाओं पर भी विचार किया जा सकता है.

बड़ी भूमिका निभा सकते हैं शरद यादव

बिहार की राजनीति पर करीब से नजर रखने वाले राजनीतिक विश्लेषकों की मानें  ने तो शरद यादव इस दौर में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. उनका राजनीतिक महत्व स्वयं नीतीश कुमार भी समझते हैं, यही कारण है कि विपक्षी दलों की एकता बनाने के संदर्भ में अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान उन्होंने शरद यादव से मुलाकात की थी. चूंकि, उन्होंने नीतीश कुमार के साथ एक बड़ी और महत्वपूर्ण भागीदारी खेली है औऱ दोनों नेताओं के बीच बेहतर तालमेल लंबे समय तक बना रहा है, वे जानते हैं कि शरद यादव की भूमिका समाजवादी विचारधारा को राष्ट्रीय राजनीति के धरातल पर मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण साबित हो सकती है.

राजनीतिक विचारधारा के तौर पर जदयू, राजद और समाजवादी पार्टी की जमीन एक रही है. इन दलों के नेताओं में वैचारिक स्तर पर बहुत ज्यादा समानता रही है और उनका वोट बैंक भी लगभग एक समान पृष्ठभूमि के लोगों को आपस में जोड़ता है. यदि इन दलों में एक बेहतर तालमेल बन जाए तो अगले लोकसभा चुनाव में बेहतर समीकरण बनाना संभव होगा. इससे भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की राह में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं, क्योंकि उन्हें यूपी-बिहार में ही सबसे बड़ा समर्थन मिलता रहा है.