नहाय खाय के साथ आज से चैती छठ की शुरुआत, लोक आस्था के पर्व में भक्तिमय माहौल
Updated: Apr 1, 2025, 11:48 IST

इसमें कद्दू की सब्जी, चने की दाल, अरवा चावल का विशेष महत्व माना जाता है. आज कई जगहों पर नहाए खाए के दिन को कद्दू भात भी कहा जाता है. आज के दिन के प्रसाद को पूरी शुद्धता के साथ बनाते हैं और पूजन पाठ करके ग्रहण करते हैं, तथा अपने इष्ट मित्रों को प्रसाद ग्रहण करने के लिए बुलाते हैं.
नहाए खाए को लेकर सुबह से ही गंगा घाटों पर छठव्रती और उनके परिजनों को भीड़ देखी गई. क्योंकि छठ का प्रसाद बनाने वाले घर के अन्य सदस्य भी पूरी तरह शुद्ध होकर ही प्रसाद बनाते हैं. कई लोग प्रसाद बनाने में गंगाजल का भी इस्तेमाल करते हैं तो अधिकांश लोग शुद्ध पानी चापाकल का प्रयोग करते हैं. नहाय खाय के बाद कल बुधवार 2 अप्रैल को छठव्रती खरना करेंगी, जिसमें पूरे दिन उपवास रहकर गंगाजल और दूध तथा गुड़ के साथ बने खीर और रोटी का प्रसाद से खरना करेगी. उसके बाद कुछ भी नहीं खाना, यहां तक की जल भी ग्रहण नहीं कर सकते.

इसके बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास रखकर व्रती गुरुवार को डूबते सूर्य का अर्ध्य देगी और शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य का अर्ध्य देकर व्रत की समाप्ति करेगी. अभी बिहार में मौसम का मिजाज बदला हुआ है और तापमान बढ़ा हुआ है. ऐसे में छठव्रती के लिए यह पर्व काफी कठिन रहेगा क्योंकि इतनी गर्मी में पानी तक पीने की परंपरा इस छठ में नहीं होती है.