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बिहार में राजनीतिक शुद्धि की नई धारा: प्रशांत किशोर ने कहा- जनसुराज गंगा’ है, जो जुड़ता है, शुद्ध होता है

हरलाखी में 'बिहार बदलाव यात्रा' के दौरान प्रशांत किशोर का बड़ा बयान, कहा- अब डर के नहीं, सोच के आधार पर होगा वोट. 
 
प्रशांत किशोर
Bihar: बिहार में राजनीतिक बदलाव की जमीन तैयार कर रही जनसुराज यात्रा हर दिन नई दिशा पकड़ रही है। यात्रा के तहत हरलाखी पहुंचे प्रशांत किशोर ने जनसभा में जनता को संबोधित करते हुए जनसुराज को “गंगा नदी” की तरह बताया और कहा, “जो भी जनसुराज से जुड़ेगा, उसका स्वभाविक रूप से शुद्धिकरण हो जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार की जनता ने 2 अक्टूबर 2024 को ही मन बना लिया था कि अब वे लालू और नीतीश के ‘डर की राजनीति’ का हिस्सा नहीं बनेंगे। अब राज्य बदलाव की ओर बढ़ चुका है।

243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जनसुराज

प्रशांत किशोर ने मंच से ऐलान किया कि जनसुराज सभी 243 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
उनके मुताबिक बिहार की जनता अब न नीतीश कुमार को दोबारा देखना चाहती है, न ही लालू यादव की पार्टी को मौका देना चाहती है। जनता विकल्प तलाश रही है, और जनसुराज वही विकल्प है, भरोसेमंद और बदलाव लाने वाला है

वोटर लिस्ट पुनरीक्षण पर तीखा हमला

चुनाव आयोग द्वारा जारी मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान पर भी प्रशांत ने कड़ा हमला बोला। उन्होंने इसे “राजनीतिक षड्यंत्र” बताते हुए कहा कि, भाजपा जान चुकी है कि बिहार से पलायन कर चुके लोगों का झुकाव अब उसकी ओर नहीं है, इसलिए उनके वोट काटने की साजिश हो रही है। उनका कहना था कि यह एनडीए को सीधा फायदा पहुंचाने की कोशिश है और आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

बांग्लादेशी वोटर का मुद्दा केवल बहाना है 

उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेशी वोटर का मुद्दा केवल एक ‘बहाना’ है। अगर बांग्लादेशी नागरिक वाकई वोटर लिस्ट में थे, तो लोकसभा चुनाव उसी लिस्ट से क्यों कराया गया? तब वह सूची सही थी और अब अचानक गलत कैसे हो गई?


जनसुराज क्या बन रहा है?

जनसुराज अब सिर्फ एक विचार नहीं रहा, यह राजनीतिक विकल्प के रूप में एक आंदोलन बनता जा रहा है। प्रशांत किशोर की रणनीति अब स्पष्ट है:

  •  डर के वोट नहीं,
  • चेतना और बदलाव के वोट

पारदर्शिता, भागीदारी और जिम्मेदारी का मॉडल

प्रशांत किशोर का यह बयान साफ संकेत देता है कि बिहार में 2025 का चुनाव तीन ध्रुवीय हो सकता है वहीँ NDA, INDIA और जनसुराज। जनता बदलाव चाहती है और जनसुराज खुद को उसी बदलाव का वाहन बता रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशांत जनता के इस भरोसे को मतों में बदल पाएंगे या नहीं।