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सिर्फ घोषणा-पत्रों तक महिला सशक्तीकरण? बिहार के 40 सांसदों में सिर्फ 3 महिलाएं

 

महिला सशक्तीकरण एक ऐसा मुद्दा है जो वर्षों से सभी राजनीतिक पार्टियों के घोषणा-पत्र में बना हुआ है. महिला सशक्तीकरण कई तरीकों से हो सकता हैं. राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना भी एक बेहतर तरीका है. इसके लिए केंद्र सरकार ने पिछले ही साल महिला आरक्षण बिल यानि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को कानून बनाया. दोनों सदनों से पास होने के बाद राष्ट्रपति से भी इसे मंजूरी मिल गई है. इन कानून के तहत लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीट आरक्षित करने का प्रावधान है. हालांकि अभी यह कानून लागू नहीं हुआ है. मौजूदा समय में लोकसभा में बिहार से महिलाओं की भागीदारी कितनी है? इसके बारे में ही आगे विस्तार से समझेंगे.

बिहार के 40 सांसदों में सिर्फ 3 महिला

लोकसभा में बिहार से महिलाओं की भागीदारी बहुत निराशाजनक है. बिहार से सिर्फ 3 ही महिला सांसद हैं. जो बिहार की कुल 40 लोकसभा सीट का महज 7 प्रतिशत है. इनमें भाजपा, जदयू  और रालोजपा की 1-1 सांसद हैं. शिवहर से भाजपा की सांसद रमा देवी, सिवान से जदयू की सांसद कविता सिंह और वैशाली से रालोजपा की सांसद वीणा देवी.

बिहार की तीनों महिला सांसदों का राजनीति से पारिवारिक नाता

राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना अच्छी बात है. लेकिन, इसमें इस बात पर भी गौर करना जरूरी है कि गैर राजनीतिक परिवार से कितनी महिलाएं राजनीति में आ रही हैं? कितनी महिलाएं अपने बल-बूते सशक्त बन रही हैं? क्योंकि यही असली महिला सशक्तीकरण है. बिहार से जो तीन महिला वर्तमान में सांसद हैं, उन तीनों का राजनीति से पारिवारिक नाता रहा है. कोई पति तो कोई सास के कारण राजनीति में आयी हैं.

पति के सहारे रमा देवी की राजनीति में एंट्री

शिवहर से लागातार 3 बार से सांसद चुनी जा रही राम देवी, अपने पति बृज बिहारी प्रसाद के सहारे राजनीति में आई. बृज बिहारी प्रसाद बिहार की राबड़ी देवी सरकार में मंत्री भी रह चुके थे. उनकी छवि बाहुबली नेता के रूप में थी. पहली बार रमा देवी ने राजद के टिकट पर 1998 में मोतिहारी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता और सांसद बनीं. इसी साल जून के महीने में राजनीतिक रंजिश के कारण बृज बिहारी प्रसाद की हत्या कर दी गई. 1999 में लोकसभा भंग हो गई और फिर से चुनाव हुए. लंबे समय तक रमा देवी राजनीति के पटल पर गौण रहीं. वर्ष 2009 में भाजपा के टिकट पर शिवहर से सांसद चुनी गईं. वर्ष 2014 और 2019 में  भी ये सिलसिला जारी रहा.

सास से विरासत में कविता सिंह को मिली राजनीति

कविता सिंह ने 2011 में दारौंदा विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव के दौरान राजनीति में कदम रखा. ये वही सीट थी जिससे उनकी सास जगमातो देवी विधायक हुआ करती थीं. 2011 में उनके निधन के बाद से  यह सीट उनकी बहु कविता सिंह के हाथ राजनीतिक विरासत के रूप में आई.  राजनीतिक जानकारों की मानें तो कविता सिंह के पति अजय सिंह की छवि एक बहुबली वाले नेता के रूप में रही है. जिस वजह से उन्हें चुनावी टिकट मिलने में दिक्कत हुई तो उन्होंने अपनी पत्नी को आगे कर दिया. 2015 में भी कविता सिंह दूसरी बार दारौंदा विधानसभा से चुनी गई. वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सिवान लोकसभा सीट पर राजद उम्मीदवार हिना शहाब को हरा कर बड़ी जीत हासिल की और पहली बार सांसद बनीं.

पति कई बार हारे विधायकी का चुनाव, पत्नी वीणा देवी विधायक के बाद सांसद भी बनीं

वैशाली की सांसद वीणा देवी के पति दिनेश प्रसाद सिंह 90 के दशक से राजनीति में सक्रिय हैं. लेकिन कई बार विधायक का चुनाव हारे. जिसके बाद उन्होंने विधान परिषद का रुख किया तो अभी तक मुड़ कर नहीं देखा.  2003 से अभी तक वो बिहार परिषद के सदस्य हैं. वीणा देवी 2001 से राजनीति में सक्रिय हुई. वर्ष 2010  में गायघाट विधानसभा से पहली बार विधायक चुनी गईं. वर्ष 2019 में राजद के दिग्गज नेता रहे रघुवंश प्रसाद को चुनाव में हराकर वह वैशाली की सांसद भी बनीं.