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Bihar: नीतीश सरकार की नई पहल, लागू होगा चकबंदी का नया नियम, किसानों को मिलेगा फायदा
जमीन विवाद को जड़ से खत्म करने के लिए बिहार सरकार भूमि सर्वेक्षण का काम करवा रही है और बहुत जल्द चकबंदी कर उन किसानों को एक जगह जमीन का भूखंड उपलब्ध करवा देगी.
 

बिहार में खेतिहर जमीन से जुड़ा विवाद सुलझाने के लिए अब राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब राज्य में जल्द ही चकबंदी के नए नियम के जरिये किसानों के अलग-अलग जगहों की खेती की जमीन एक जगह की जाएगी। खबरों की मानें तो राज्य सरकार आईआईटी रूड़की की टीम के सहयोग से यह काम करेगी। इसके लिए आईआईटी रूड़की से आई टीम ने भूमि सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया है। सरकार के इस पहल से जहां एक तरफ किसानों को फायदा मिलेगा वहीं जमीन विवाद में भी कमी आने की संभावना है।  

चकबंदी क्या है? 

चकबंदी वह विधि है जिसके द्वारा किसी व्यक्ति के टुकड़ों में बंटी जमीन को विभाजित होने से रोका जाता है। भारत में जहां प्रत्येक व्यक्तिगत भूमि (खेती) वैसे ही न्यूनतम है, वहां कभी कभी खेत इतने छोटे हो जाते हैं कि खेती करने में भी बाधा पड़ती है। चकबंदी द्वारा चकों का विस्तार होता है, जिससे कृषक के लिए कृषिविधियां सरल हो जाती हैं और पारिश्रमिक तथा समय की बचत के साथ साथ चक की निगरानी करने में भी सरलता हो जाती है। इसके द्वारा उस भूमि की भी बचत हो जाती है जो बिखरे हुए खेतों की मेड़ों से घिर जाती है।

क्या है बिहार सरकार का कहना?

बता दें कि जमीन विवाद को जड़ से खत्म करने के लिए बिहार सरकार भूमि सर्वेक्षण का काम करवा रही है और बहुत जल्द चकबंदी कर उन किसानों को एक जगह जमीन का भूखंड उपलब्ध करवा देगी, जिनकी जमीन अलग-अलग जगह पर है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री राम सूरत राय के मुताबिक जमीन सर्वे का काम आईआईटी रूड़की की पांच सदस्य टीम से कराया गया है। इस काम को लगभग पूरा कर लिया है, आने वाले दिनों में चकबंदी कर किसानों को जमीन मुहैया करा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इसकी पहल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज से सात साल पहले किया था। सरकार की इस पहल के बाद भूमि विवाद में कमी आएगी। किसान चाहें तो अपनी जमीन को किराए पर दे सकेंगे। जमीन को बेच सकेंगे।

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