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श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों की मौज! राष्ट्रपति भवन में फरमा रहे आराम; गोटबाया अब भी लापता
 

श्रीलंका अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुज़र रहा है लेकिन शनिवार को श्रीलंका में जो कुछ हुआ, उसे आने वाले कल में लंबे समय तक याद रखा जाएगा. आर्थिक हालात से त्रस्त जनता ने शनिवार को राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के आवास पर कब्जा कर लिया. वहीं राष्ट्रपति अपना आवास छोड़कर भाग गए हैं. प्रदर्शनकारियों ने राजपक्षे के आधिकारिक आवास पर घुसकर जमकर तोड़फोड़ भी की. उधर, रैली के दौरान श्रीलंका की पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई. इसमें करीब 30 लोग घायल हो गए. 

लोग राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे का इस्तीफा मांग रहे थे. स्थिति बिगड़ती देख कुछ ही देर में राजपक्षे पद छोड़ने के लिए तैयार हो गए और 13 जुलाई को इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। देश के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने भी शनिवार को इस्तीफे की पेशकश की जिनका घर प्रदर्शनकारियों ने फूंक दिया।उधर, देश को अभी तक यह जानकारी नहीं है कि राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे कहां हैं. उधर, रविवार को कैबिनेट से एक और इस्तीफा आ गया. दो दिनों में अब तक चार मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं.

इधर आर्मी चीफ शवेंद्र सिल्वा ने रविवार को एक बयान जारी किया और कहा कि "एक ऐसा अवसर सामने आया है, जब हमें इस संकट का हल शांतिपूर्वक हल करना है." उन्होंने श्रीलंका के नागरिकों से अपील की कि वो देश में शांति बनाए रखने के लिए सेना और पुलिस का सहयोग करें. लेकिन शनिवार को श्रीलंका में कुछ ऐसा हुआ जिसकी पृष्ठभूमि तो महीनों से तैयार हो रही थी लेकिन शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि नाराज़ लोग राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री के निजी आवास में घुस जाएंगे.राष्ट्रपति भवन के अंदर दाख़िल होकर तोड़फोड़ करेंगे और पीएम के निजी आवास को आग लगा देंगे.लेकिन ये सब कुछ कल श्रीलंका में हुआ. शनिवार को आम लोगों ने संभवत: पहली बार यह भी अनुभव किया कि राष्ट्रपति कैसे रहते हैं. उनके 'महल' में किस-किस तरह की सुविधा होती है. 

श्रीलंका के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब सरकार और उसकी नीतियों से नाराज़ चल रहे लोग राष्ट्रपति भवन में दाखिल हो गए. ये वो ही भवन था, जो कुछ घंटों पहले तक सुरक्षाकर्मियों और अंगरक्षकों की कड़ी निगरानी में था.राष्ट्रपति भवन में दाख़िल हुए प्रदर्शनकारी आज भी यानी रविवार, 10 जून को भी राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के सरकारी आवास के अंदर मौजूद हैं.

प्रदर्शनकारी छोटे छोटे समूहों में अंदर आ रहे थे और राष्ट्रपति भवन, वहां की आलीशान चीज़ें, और विलासितापूर्ण जीवन को देखकर बाहर निकल रहे थे. एक समूह के जाने के बाद, दूसरा समूह अंदर आ रहा था. जिस भवन के भीतर किसी आम नागरिक को जाने की इजाज़त नहीं होती थी, जिस इमारत के चारों ओर के कुछ किलोमीटर के दायरे में भी सुरक्षाकर्मी तैनात होते थे, वहां शनिवार को सड़क पर तिलभर की भी जगह नहीं थी.भीड़ की सघनता इतनी अधिक थी कि पुलिस और सेना राष्ट्रपति भवन से हटा ली गई. उनके लिए भी ऐसा कुछ होगा, यह यक़ीन कर पाना मुश्किल हो रहा था.

बीबीसी के एक रिपोर्ट के मुताविक श्रीलंका में प्रदर्शन में शामिल बहुत से लोगों का कहना है कि जो शनिवार को हुआ, वो श्रीलंका में नए युग की शुरुआत है.इस घटना से क़रीब एक सप्ताह पहले ही राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और पीएम रनिल विक्रमसिंघे की एक तस्वीर वायरल हुई थी. इस तस्वीर में दोनों नेता संसद में मुस्कुराते हुए नज़र आ रहे थे.लोगों ने उस तस्वीर का ज़िक्र करते हुए बहुत से लोगों ने गुस्सा ज़ाहिर करते हुए कहा कि वो दोनों कैसे मुस्कुराते हुए नज़र आ रहे थे जबकि लाकों लोग एक-एक समय के खाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. लेकिन राजनीति में एक सप्ताह बहुत कुछ बदल देने वाला होता है.

बता दें की श्रीलंका एक अभूतपूर्व आर्थिक उथल-पुथल का सामना कर रहा है. 2.2 करोड़ लोगों की आबादी वाला देश सात दशकों में सबसे खराब दौर से गुजर रहा है.श्रीलंका में विदेशी मुद्रा की कमी है, जिससे देश ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं के जरूरी आयात के लिए भुगतान कर पाने में असमर्थ हो गया है.आर्थिक हालात से त्रस्त जनता ने शनिवार को राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के आवास पर कब्जा कर लिया.