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RJD नेता तेजस्वी यादव ने CM को पत्र लिखकर कर दी ये मांग
तेजस्वी ने कहा कि कोशी, बागमती, गंडक, बूढ़ी गंडक, कमला बलान, घाघरा महानन्दा जैसी नदियां बारहमासी है और बरसात के मौसम में इन नदियों में पानी की मात्रा तीव्रता से बढ़ने के कारण संबंधित क्षेत्रों के लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिलता.
 

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर बड़ी मांग की है। तेजस्वी यादव ने सूबे के मुखिया नीतीश कुमार को पत्र लिखकर एक बार फिर से प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की बात कही है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को एक बार फिर से पत्र लिखा। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने मांग रखी कि राज्य के सर्वदलीय नेताओं का एक शिष्टमंडल प्रधानमंत्री से मुलाकात करे और बिहार में बाढ़ से उत्पन्न समस्याओं को प्रधानमंत्री के सामने रखे। 

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को दो पन्नों का पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने लिखा कि बिहार ऐसा राज्य है जो हर साल बाढ़ और सुखाड़ दोनों का झेलता है। इससे प्रतिवर्ष करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं। हजारों लोगों की मृत्यु हो जाती है तथा बड़ी संख्या में जानवरों को क्षति पहुंचती है। बिहार के कम-से-कम 20 जिले  सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, खगड़िया, सारण, समस्तीपुर, सीवान, मधुबनी, मधेपुरा, सहरसा, भागलपुर कटिहार, वैशाली पटना आदि ऐसे जिला हैं, जो हर साल बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं। बाढ़ की इस गंभीर समस्या के लिए राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार की ओर से कई घोषणा की गई। लेकिन अभी तक इन पर ईमानदारी से काम नहीं हुआ है। 

तेजस्वी यादव ने आगे लिखा बाढ़ जैसी गंभीर समस्या के निदान के लिए कई नहरों और बराजों के निमार्ण कराने के साथ राज्य की नदियों को जोड़ने की मांग भी होती आ रही है। साल 2011 में राज्य में 'रिवर लिंकिंग प्रोजेक्ट्स' की घोषणा की गई थी। इसमें राज्य की कई नदियों को जोड़ने के लिए अनेक योजनाओं का जिक्र था। इस प्रोजेक्ट में जिन नदियों को जोड़ा जाना था उनमें बागमती-बूढ़ी गंडक, बूढ़ी गंडक- बाया- गंगा, कोसी- बागमती गंगा आदि शामिल थे। जबकि केंद्र सरकार ने 2019 में इनमें से केवल एक नदी "कोशी-मेची" को जोड़ने की योजना को मंजूरी दी। हालांकि, इसका योजना की शुरुआत अब तक नहीं हो सकी है। तेजस्वी यादव ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। 

आगे तेजस्वी यादव ने नदियों को जोड़ने के कारण और जरूरत का भी जिक्र किया। तेजस्वी ने कहा कि कोशी, बागमती, गंडक, बूढ़ी गंडक, कमला बलान, घाघरा महानन्दा जैसी नदियां बारहमासी है और बरसात के मौसम में इन नदियों में पानी की मात्रा इस तीव्रता से बढ़ जाती है कि संबंधित क्षेत्रों के लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिलता। नतीजा यह नदियां राज्य में भयंकर तबाही मचाती है। इसलिए नदियों का जोड़ा जाना आवश्यक है। वहीं तेजस्वी यादव ने दो पन्नों के इस पत्र में बाढ़ से होने वाले जानमाल और अरबों की आर्थिक क्षति का भी जिक्र किया। कहा कि हर साल हजारों जानमाल और अरबों की आर्थिक क्षति को देखते हुए इन योजनाओं को तीव्र गति से मिशन मोड में करने की आवश्यकता है। नदियों को जोड़ने की योजना कछुए की गति से चल रही है। 


यही नहीं उन्होंने एनडीए सरकार पर निशाना साधा। कहा कि वर्तमान में केंद्र और राज्य दोनों जगह एनडीए की ही सरकार है, ऐसी स्थिति में राज्य के लिए इतनी महत्वपूर्ण योजना को लेकर सरकार का जो रवैया है वह समझ से परे है। डबल इंजन की सरकार और 40 में से 39 एनडीए के लोकसभा सांसद होने के बावजूद राज्य को विशेष दर्जा देने की बात तो दूर अभी तक विशेष पैकेज भी नहीं मिल पाया है। विगत चार वर्षों में बाढ़ राहत के लिए केन्द्र से बिहार को उचित मदद नहीं मिल पाई। जबकि बिहार से कम जनसंख्या वाले राज्यों को, जहां बिहार की तुलना में बाढ़ की विभीषिका भी काफी कम होती है, उन राज्यों को भी बिहार से अधिक आर्थिक सहायता मिली है। यह भी विचारणीय है। 

तेजस्वी यादव ने अनुरोध करते हुए नदियों को जोड़ने, बांधों एवं नहरों को बनाने की उपर्युक्त सभी योजनाओं को केंद्र सरकार से "राष्ट्रीय योजना" घोषित कराने की मांग की। तेजस्वी ने कहा "मेरा सुझाव और आग्रह है कि राज्यहित में प्रतिवर्ष बाढ़ की विभीषिका के कारण होने वाले नुकसान और नदी जोड़ने की योजना के महत्व के संदर्भ में आपके नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर उपर्युक्त मांगों को रखे।"
 

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