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सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में उठाया छत्तीसगढ़ के सहकारी बैंकों, छोटे किसान-व्यापारियों से जुड़ा जनहित का मुद्दा

भाजपा के वरिष्ठ नेता और रायपुर से सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मंगलवार को संसद के प्रश्नकाल में छत्तीसगढ़ में सहकारी बैंकों, छोटे किसानों और व्यापारियों के आर्थिक सशक्तिकरण तथा डेयरी सहकारी समितियों को मजबूती देने से जुड़े अहम सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह से जानना चाहा कि सरकार देशभर में नई सहकारी समितियों की स्थापना और मौजूदा समितियों को और प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठा रही है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल की प्रमुख मांगें
सांसद अग्रवाल ने खासतौर पर छत्तीसगढ़ में सहकारी बैंकों की कार्यप्रणाली को सुधारने, छोटे किसानों और व्यापारियों को सरल एवं सुलभ ऋण देने की नीति पर सरकार की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने डेयरी सहकारी समितियों के विस्तार, दूध उत्पादकों को उचित मूल्य दिलाने, सहकारी संगठनों के जरिए महिलाओं और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने तथा कृषि आधारित उद्योगों को वित्तीय सहयोग देने की योजनाओं की जानकारी भी मांगी।

अमित शाह का जवाब: सहकारिता के विकास को लेकर सरकार प्रतिबद्ध
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार सहकारी बैंकों और छोटे किसानों-व्यापारियों की स्थिति सुधारने के लिए व्यापक रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि पूरे देश में 2 लाख बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की योजना को स्वीकृति दी गई है, जिसे नाबार्ड, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड, राष्ट्रीय मत्स्यकी विकास बोर्ड और राज्य सरकारों के सहयोग से लागू किया जा रहा है।

अमित शाह ने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने ‘श्वेत क्रांति 2’ पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य संगठित डेयरी क्षेत्र में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाना, छोटे डेयरी किसानों को बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। सरकार अगले 5 वर्षों में सहकारी समितियों के माध्यम से दूध खरीद 50% तक बढ़ाने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है। अब तक 8,294 नई डेयरी सहकारी समितियों का पंजीकरण किया जा चुका है।

सहकारी क्षेत्र में सरकार के बड़े कदम

-युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर: राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है, जिसके तहत अब तक 1,90,894 लोगों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें 38,179 महिलाएं शामिल हैं।

-वित्तीय सहयोग: सहकारी समितियों के विकास के लिए वर्ष 2024-25 में 89,750 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।

-आवास ऋण में बढ़ोतरी: शहरी सहकारी बैंकों की आवास ऋण सीमा 30 लाख से बढ़ाकर 60 लाख रुपये की गई है, जबकि ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए यह सीमा 75 लाख रुपये कर दी गई है।

-ऋण सुविधा में सुधार: सहकारी बैंकों से दिए जाने वाले ऋण पर 85% तक जोखिम कवरेज प्रदान किया गया है, जिससे छोटे किसान और व्यापारी आसानी से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकें।

-तकनीकी सुधार: 1,500 शहरी सहकारी बैंकों को आवश्यक सूचना प्रौद्योगिकी, संरचना और संचालन सहायता देने के लिए नेशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन कोऑपरेटिव बैंक्स एंड क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड की स्थापना की गई है।

छत्तीसगढ़ के किसानों और व्यापारियों को मिलेगा सीधा लाभ
बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार की पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता के क्षेत्र में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे छत्तीसगढ़ के किसानों, छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार की नई सहकारी योजनाएं प्रदेश में दुग्ध उत्पादकों, महिला उद्यमियों और छोटे कारोबारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।