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संतरे बेचने वाले एक 64 साल के शख्स हरेकाला हजब्बा को मिला पद्मश्री
 

संतरे बेचने वाले एक 64 साल के शख्स हरेकाला हजब्बा को देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया है. राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में सोमवार को आयोजित समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कर्नाटक के रहने वाले हजब्बा को यह सम्मान दिया. उन्हें यह सम्मान ग्रामीण शिक्षा में क्रांति लाने के लिए दिया गया है. 

आपको बता दे कि कर्नाटक के मंगलौर में बस डिपो पर संतरा बेचने वाले हरिकेला हजब्बा ने खुद कभी भी पढ़ाई नहीं की, लेकिन वे चाहते हैं कि गांव के बच्चे पढ़ें. इतना ही नहीं , हजब्बा ने संतरे बेचकर अपनी जमा पूंजी से गांव में एक स्कूल बनवाया, ताकि ग्रामीण बच्चे स्कूली शिक्षा हासिल कर सकें. वैसे बता दे  गांव में स्कूल खोलने का विचार उन्हें 1978 में आया, जब एक विदेशी नागरिक ने उनसे संतरे का भाव पूछा. वे बताते हैं, ‘मैं विदेशी से बात नहीं कर सका था. मुझे बुरा लगा और गांव में स्कूल खोलने का विचार किया.

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वे कहते हैं, ‘मैं केवल कन्नड़ जानता हूं, अंग्रेजी या हिंदी नहीं. मैं परेशान था, क्योंकि मैं विदेशी की मदद नहीं कर पाया था. मैंने अपने गांव में स्कूल बनाने के बारे में सोचा.’ हालांकि, उनका यह सपना पूरा होने में दो दशक लग गए. हजब्बा साल 1977 से मंगलौर बस डिपो पर संतरे बेच रहे हैं. उन्हें अपने इन कामों के चलते अक्षर संत की उपाधि भी मिली है. 28 बच्चों से शुरू हुए विद्यालय में आज कक्षा 10वीं तक 175 बच्चे पढ़ाई करते हैं.